बोद्धिक सम्पदा में पिछड़ेपन की दास्ताँ

बोद्धिक सम्पदा (ट्रेडमार्क, सर्विसमार्क, पेटेंट) एक ऐसा क्षेत्र है जिसमे हमारा देश अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना प्रतिनिधित्व नहीं कर पा रहा है, ऐसा नहीं है कि भारत देश में उर्वर मस्तिक्ष नहीं है, हमारे देश में कई ऐसी प्रतिभाएं है जिनके वैश्विक पटल पर आने से सम्पूर्ण विश्व उन प्रतिभाओं को देख दाँतों तले अपनी उंगली दबा ले परन्तु हम अपने उर्वर मस्तिक्ष से निकले विचार व उत्पाद को संगृहीत नहीं कर पा रहे है या सरल शब्दों में कहे तो उन्हें पंजीकृत नहीं कर पा रहें है | इसी कमी के कारण अमेरिका ने हल्दी व अन्य आयुर्वेदिक ओषधियों का अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट करवा लिया था |


बोद्धिक सम्पदा के पंजीयन के लिए केंद्र सरकार ने एक महानियंत्रक बना कर उनके कार्यालय को समस्त व्यापर चिन्ह (ट्रेडमार्क), एकस्व अभिकल्प (पेटेंट) के पंजीयन की जिम्मेदारी सौप दी है, जहाँ की कार्यप्रणाली इतनी क्लिष्ट कर दी गई है कि यदि कोई बिना किसी एजेंट की सहायता लिए पंजीयन करवाने के सोचे भी तो वह न कर पाए हांलाकि अब यह सुविधा ऑनलाइन भी मौजूद है परन्तु पंजीयन करने वाले वाले की कई जिज्ञासा होती है जिसके निराकरण का कोई उपाय ऑनलाइन मौजूद नहीं है जिसके कारण दस्तावेजों में कमी के चलते पंजीयन प्रकिया पूरी नहीं हो पाती है |


अगर किसी ने पंजीयन के लिए सफल तरीके से ( स्वयं ही या एजेंट के माध्यम से ) आवेदन कर भी दिया है तो पंजीयन की प्रकिया पूर्ण होने में 3 से 4 साल का समय लग रहा है जो एक नागरिक के सब्र का बाँध तोड़ने के लिए पर्याप्त है | ऐसी स्थिति में वह अपने मित्रों व सगे सम्बन्धियों को बोद्धिक सम्पदा के पंजीयन से दूर रहने की सलाह ही देता है, पंजीयन के कुछ समय उपरांत इसका नवीनीकरण भी करवाना होता है जिसकी प्रक्रिया व शुल्क भी कम त्रास नहीं देता है, उदहारण के लिए यदि एक व्यक्ति अपने व्यापार चिन्ह को पंजीकृत करवाता है तो उसका शासकीय शुल्क रुपये 4500/-  है व  नवीकरण शुल्क रुपये 10,000/- है| पंजीकरण का शुल्क व नवीनीकरण के शुल्क को देखकर यह नहीं लग रहा है की यह शासकीय तौर पर की जा रही ब्लैकमेलिंग है| क्योंकि आपने एक व्यापर चिन्ह को लेकर अगर अपना व्यापार फैला लिया है तो उसका नविनिकरण करना आपकी मज़बूरी है अन्यथा कोई दूसरा व्यक्ति या व्यापारिक संस्थान भी उस व्यापर चिन्ह को लेकर अपना व्यापार शुरू कर सकता है |


सरकार को चाहिए की वह नागरिकों के लिए खास तौर पर देश युवाओं व उर्वर मस्तिक्ष के लिए विशेष शिविर लगाये जिसके अंतर्गत बोद्धिक सम्पदा के पंजीयन की प्रक्रिया सरल रूप में व रियायती दरों पर हो जिससे की हमारे भारत देश का नाम बोद्धिक सम्पदा के क्षेत्र में भी वैश्विक पटल पर आ सके |